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Wednesday, April 29, 2015

कंप्यूटर की-बोर्ड के इन 12 कीज का यूज जानते हैं आप?

शशि भूषण, नई दिल्ली (22 अप्रैल):कंप्यूटर की-बोर्ड की सबसे ऊपरी लाइन में मौजूद Key की पूरी लाइन देखकर क्या आप भी कनफ्यूजन में रहते हैं कि इनका यूज क्या है? आपको बता दें किF1 से लेकर F12 तक की ये 12 कीज बड़े काम की हैं। इन कीज को 'फंक्शन की' कहते हैं। इनकी मदद से आप कंप्यूटर पर तेजी से काम कर सकते हैं।
जानिए, इन 12 कीज का यूज:

F1
- कंप्यूटर को स्विच ऑन करते ही यह की दबा देंगे तो कंप्यूटर का सेटअप (CMOS) खुल जाएगा, जिसमें सेन्सिटिव कंप्यूटर सेटिंग्स को देखा या बदला जा सकता है।
- अगर आपने विंडोज़ खोल लिया है, तो इस की को दबाने पर विंडोज हेल्प एंड सपोर्ट डायलॉग खुलेगा, जिसमें सामान्य समस्याओं के समाधान दिखाए गए हैं।
- अगर आप इंटरनेट एक्सप्लोरर ब्राउजर में काम कर रहे हैं, तो यह की दबाने पर इस ब्राउजर का हेल्प पेज खुलेगा।
- क्रोम ब्राउजर में यही की दबाने पर गूगल क्रोम का हेल्प सेंटर खुल जाएगा।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में कंट्रोल+F1 दबाने पर सॉफ्टवेयर फुल स्क्रीन मोड में चला जाएगा। फिर से दबाने पर दोबारा सामान्य हो जाएगा।

F2
- विंडोज में किसी फाइल, आइकन या फोल्डर पर क्लिक करने के बाद F2 दबाने पर उसे फौरन रीनेम किया जा सकता है।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में कंट्रोल+F2 दबाने से प्रिंट प्रिव्यू पेज खुलेगा, जो दिखाता है कि आपका डॉक्युमेंट प्रिंट होने पर कैसा दिखेगा।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में Alt+Control+F2 को दबाने पर फाइल ओपन डायलॉग बॉक्स खुल जाता है।

F3
- विंडोज में F3 दबाने से सर्च बॉक्स खुल जाता है, जिसका इस्तेमाल फाइलों या फोल्डरों को खोजने के लिए कर सकते हैं।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में Shift+F3 दबाने पर अंग्रेजी का सलेक्ट किया हुआ मैटर अपर केस या लोअर केस में बदला जा सकता है।
- माइक्रोसॉफ्ट डॉस या कमांड प्रॉम्प्ट विंडो में F3 दबाने पर पहले टाइप की गई कमांड दोबारा टाइप हो जाती है।

F4
- विंडोज एक्सप्लोरर (कंप्यूटर, माइ कंप्यूटर वगैरह) में इसे दबाने पर अड्रेस बार खुल जाती है। इंटरनेट एक्सप्लोरर में भी वेबसाइट का पता डालने के लिए अड्रेस बार खुलती है।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में यह कुंजी दबाने पर वही काम रिपीट हो जाएगा, जो आपने अभी-अभी किया था। अगर आपने कोई शब्द टाइप किया है, तो वह दोबारा टाइप हो जाएगा। टेबल बनाई है, तो एक और टेबल बन जाएगी। अगर कोई टेक्स्ट बोल्ड किया है तो वह फिर से सामान्य और फिर से बोल्ड हो जाएगा।
- Alt+F4 को दबाने पर वह सॉफ्टवेयर बंद हो जाएगा जो अभी खुला हुआ है।
- Control+F4 दबाने पर किसी सॉफ्टवेयर के भीतर खुली कई विंडोज में से मौजूदा विंडो बंद हो जाएगी। जैसे इंटरनेट एक्सप्लोरर में खुले कई टैब में से एक टैब बंद हो जाएगा या फिर वर्ड में खुले कई दस्तावेजों में से एक बंद हो जाएगा।

F5
- यह रिफ्रेश की के तौर पर काम करता है। विंडोज में कोई फोल्डर कॉपी होने के बाद दिखाई नहीं दे रहा, तो इसे दबाइए, दिखने लगेगा। इंटरनेट ब्राउजरों में दिख रहे वेब पेजों को रिफ्रेश या रिलोड करने के लिए यह बहुत इस्तेमाल होता है।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में इसे दबाने पर Find and replace डायलॉग खुल जाता है।
- पावरपॉइंट में F5 दबाने पर स्लाइड शो चालू हो जाता है।
- माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में Shift+F5 दबाने पर Find and Replace सुविधा खुलती है।
- फोटोशॉप में इसे दबाने पर कई तरह के ब्रश सामने आ जाते हैं, जिनमें से अपनी पसंद का ब्रश चुना जा सकता है।

F6
- इसे दबाने पर विंडोज टास्कबार में खुले फोल्डरों की सामग्री दिखने लगती है।
- इंटरनेट ब्राउजर में इसे दबाने पर करसर अड्रेस बार में चला जाता है और आप फौरन वेब अड्रेस टाइप कर सकते हैं।
- अगर माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में कई डॉक्युमेंट खुले हैं, तो उन्हें एक-एक कर देखने के लिए Control+Shift+F6 का प्रयोग कर सकते हैं।

F7
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में कोई दस्तावेज टाइप करने के बाद अगर F7 दबाएंगे, तो उसकी स्पेलिंग चेक होनी शुरू हो जाएगी।
- इंटरनेट एक्सप्लोरर में इसे दबाने पर कैरट ब्राउजिंग सुविधा शुरू हो जाती है, जिसका इस्तेमाल कीबोर्ड के जरिए वेब पेजों पर टेक्स्ट सलेक्ट करने, आगे-पीछे जाने आदि के लिए किया जा सकता है।

F8
- अगर कंप्यूटर को स्टार्ट करते समय इसे दबा देंगे, तो ऑपरेटिंग सिस्टम को खोलने के लिए उपलब्ध कई मोड दिखाई देंगे, जिनमें सेफ मोड और कमांड प्रॉम्प्ट भी शामिल हैं।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में Alt+F8 दबाने पर मैक्रो तैयार करने की सुविधा शुरू हो जाती है, जिसके जरिए बार-बार किए जाने वाले कामों को करने के लिए छोटे-छोटे स्थायी निर्देश रेकॉर्ड किए जा सकते हैं।
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में टेक्स्ट को सिलेक्ट करने के लिए F8 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

F9
- माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक में ईमेल पाने-भेजने (सेंड-रिसीव) के लिए इसका इस्तेमाल करें।
- क्वार्क एक्सप्रेस में इसे दबाने पर मेजरमेंट टूलबार खुल जाता है।
- कुछ लैपटॉप में इसे दबाकर स्क्रीन की चमक (ब्राइटनेस) को कंट्रोल किया जा सकता है।

F10
- किसी सॉफ्टवेयर में काम करते हुए इस कुंजी को दबाने पर मेन्यू बार सक्रिय हो जाता है, जैसे आपने वहां क्लिक किया हो।
- Shift+F10 को एक साथ दबाने का ठीक वैसा असर होता है, जैसा माउस के राइट क्लिक का। किसी आइकन, फाइल या इंटरनेट एक्स्प्लोरर में किसी लिंक पर इन कुंजियों को दबाकर देखिए, कॉन्टेक्स्ट मेनू खुल जाएगा।
- Control+F10 का इस्तेमाल माइक्रोसॉफ्ट वर्ड की विंडो का आकार घटाने-बढ़ाने (मिनिमाइज- मैक्सिमाइज) करने के लिए किया जा सकता है।

F11
- इंटरनेट एक्सप्लोरर, क्रोम आदि ब्राउजरों में फुल स्क्रीन को सक्रिय-निष्क्रिय करने के लिए इसे आजमाएं।
- Alt+F11 को दबाने पर माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के सॉफ्टवेयरों में विजुअल बेसिक कोड विंडो खुल जाती है, जिसका इस्तेमाल एक्सपर्ट यूजर करते हैं।

F12
- माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में इसे दबाने पर Save As.. डायलॉग बॉक्स खुलता है।
- Shift+F12 से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का डॉक्युमेंट सेव हो जाता है।
- Control+Shift+F12 से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में खुला डॉक्युमेंट प्रिंट हो जाता है।

Monday, April 20, 2015

बाजार में आने वाले हैं माइक्रोसॉफ्ट के दो जबरदस्त फोन

बजट स्मार्टफोन के व्यापार में माइक्रोसॉफ्ट ने एक नया कदम बढ़ाते हुए दो नए डिवाइस की घोषणा की है। ये हैं माइक्रोसॉफ्ट लूमिया 640 और 640 XL। कंपनी ने इनकी घोषणा बार्सिलोना में हुए 'वर्ल्ड मोबाइल कांग्रेस 2015' में की है।
चलिए हम आपको बताते हैं कि इन दोनों फोन्स में कंपनी ने इस बार क्या नया किया है। दोनों फोन्स में कुछ खूब ऐसी हैं जो दोनों में कॉमन हैं। दोनों डिवाइस देखने में अच्छे लगते हैं और दोनों ही फोन्स का डिज़ाइन भी अच्छा है। लूमिया 640 8.8mm चौड़ा है और इसका वजन 145 ग्राम है जबकि लूमिया 640 XL 9mm चौड़ा है और लूमिया 640 से 25 ग्राम ज्यादा भारी है। साथ ही यह फोन डूअल सिम भी है।

माइक्रोसॉफ्ट 640 में 5 इंच का IPS डिस्प्ले है जिसका रिज़ॉल्यूशन 720 पिक्सल है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट 640 XL में 5.7 इंच का डिस्प्ले है जिसका रिजॉल्यूशन 720p है। दोनों डिवाइसेस में गोरिल्ला ग्लास 3 प्रॉटेक्शन दिया गया है। दोनों फोन में ही 1.2GHz quad-core Snapdragon प्रोसेसर, 1GB RAM दिया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट 640 और 640 XL दोनों को ही विंडोज 10 तक अपग्रेड किया जा सकता है। साथ ही माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का 365 का एक साल का सब्सक्रिप्शन है। दोनों फोन में 8 GB का इंटरनल स्टोरेज है जिसे 128 GB तक बढ़ाया जा सकता है।

हां, एक खास बात कैमरे से जुड़ी हुई। माइक्रोसॉफ्ट 640 XL के कैमरे में एक बड़ा अपग्रेड किया गया है। इसमें है 13MP का बैक कैमरा कार्ल जीस ऑप्टिक्स के साथ और 5 MP का फ्रंट कैमरा जबकि दूसरे फोन, माइक्रोसॉफ्ट 640 में पहले की ही तरह 8मेगापिक्सल का बैक कैमरा और 1मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। इसकी बैटरी लाइफ काफ़ी अच्छी है। माइक्रोसॉफ्ट ने 640 में 2500 mAh की बैटरी और 640 XL में 3000 mAh बैटरी रखी है।

अगर आप फोन के रंगों को लेकर काफी एक्सपेरिमेंटल मूड में रहते हों तो आपको इसमें चुनने के लिए कई रंगो के विकल्प मिलेंगे। जैसे, ऑरेंज, ब्लैक, मैट वाइट, ग्लॉसी वाइट। अब अगर कीमत की बात करें तो माइक्रोसॉफ्ट के लूमिया 640 की कीमत है लगभग 10,000 रुपए जबकि माइक्रोसॉफ्ट 640 XL की कीमत लगभग 13,000 रुपए है।

आज से फ्लिपकार्ट पर ‘बिग एप शॉपिंग डेज’ सेल शुरू

पिछले वर्ष के बिग बिलियन डे सेल की आर्थिक सफलता के बाद, फ्लिपकार्ट एक अन्य बहुत बड़ी सेल के साथ वापसी कर रहा है। कुल तीन दिन चलने वाली फ्लिपकार्ट बिग एप शॉपिंग डेज सेल सोमवार से शुरू हो गया है। हालांकि सेल पर डिस्काउंट ऑफर उतने लुभावने नहीं नजर आ रहे, जितने की पिछले साल दिखाई दिए थे। फिर भी फ्लिपकार्ट एप को डाउनलोड करने के लिए बहुत से प्रलोभन दिए जा रहे हैं।
क्योंकि फ्लिपकार्ट बिग एप शॉपिंग डेज सेल के डिस्काउंट केवल फ्लिपकार्ट एप द्वारा एंड्रायड, आइफोन और विंडो फोन यूजर्स के लिए उपलब्ध है। आप इन्हें वेबसाइट पर नहीं पा सकते। फिर भी फ्लिपकार्ट ने डिस्काउंड के बार में अपनी वेबसाइट पर जोर-शोर से प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वे यूजर को एप डाउनलोड करके ऑफर्स का फायदा लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
फ्लिपकार्ट और उसकी प्रतिद्वंदी स्नैपडील अपने-अपने एप को जोर-शोर से प्रमोट कर रहे हैं, इसलिए अपने मोबाइल एप कंटेंट को वेबसाइट पर दिखाना बंद कर दिया है, खासकर जो एंड्रायड, आई फोन और विंडो यूजर के लिए तैयार किया गया है और ग्राहको को मजबूर किया जा रहा है कि वो जितना जल्दी हो सकें एप को डाउनलोड करें । अपने एप को इंस्टाल कराने और उसका प्रयोग करवाने के लिए फ्लिपकार्ट ने बिग एप शॉपिंग डेज के रूप में एक नई शुरुआत की है
फोकस इस बात पर है कि यूजर एप को समझकर इसे ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें और एप को आशाजनक माइंड सेट के साथ इंस्टाल करें। ग्राहक भी अब संभवत: ज्यादा एप के साथ ही लॉग्ड रहने लगे हैं। इसलिए कोशिश की जा रही है कि ग्राहक एप के द्वारा ही ज्यादा से ज्यादा खरीदारी करें, खासकर कैश ऑन डिलिवरी के प्रचलन और आरबीआई के निर्देश ‘रिलेक्स द ओटीपी रिक्वायरमेंट” के कारण।
फ्लिपकार्ट की बिग एप शॉपिंग डे़ज सेल में जो डील ऑफर की जा रही है, उनमें सबसे प्रमुख है 2,000 की छूट ‘मोटो जी (जेन 2)’ पर, रुपये 1,5000 की छूट 16 जीबी के ‘अस्सजेनफोन 5’ और ‘लेनोवो वाइब एक्स 2’ एंव ‘लेनोवो वाइब जेड2 प्रो’ और इसके अलावा और भी बहुत सी चीजों पर डिस्काउंट।

ड्रायविंग के वक्‍त फोन यूज करने से रोकेगी यह तकनीक

नई दिल्ली। दुनियाभर में होने वाले सड़क हादसों का एक कारण ड्रायविंग के वक्त मोबाइल का उपयोग करना भी है। ऐसे में इस खतरे से निपटने के लिए कुछ कंपनियां ऐसे गैजेट बनाने में लगीं है जो इससे पार पाने में मदद कर सके।
इसी कड़ी में कार बनाने वाली कंपनियां भी कई सारे एक्सपेरिपेंट्स कर रही है। इनमें शेवर्ले की 'टीन ड्रायवर' तकनीक के अलावा जनरल मोटर्स की हेड एंड आई तकनीक भी शामिल है। इनके अलावा कोरियन कार मेकर्स ह्युंडई ने एक आसान रास्ता खोज निकाला है।
कंपनी की यह तकनीक मोबाइल के उन फीचर्स को ड्रायविंग के वक्त डिसेबल कर देगी जो चालक का ध्यान भटकाने का प्रमुख कारण हो सकते हैं। कार अगर तेज चल रही है तो यह तकनीक ड्रायवर को केवल वहीं फंक्शन उपयोग करने देगी जो ऐसे में सुरक्षित हों। उदाहरण के लिए यह ऐसी स्थिति में ड्रायवर की सीट के आसपास फोन की एसएमएस सुविधा को डिसेबल कर देगी।
इस तकनीक का उपयोग करने के लिए वाहन के आसपास एंटिना लगाने के बाद मोबाइल सिंग्नल को मॉनिटर किया जाता है। इसके बाद सीस्टम विवेकपूर्ण तरीके से यह निर्णय लेता है कि कौन सा फीचर चलने दिया जाए और कौन से फीचर को डिसेबल कर दिया जाए। हालांकि अभी इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि अभी इस पर काम जारी है।

फ़िज़ियॉलोजी की विधि

फ़िज़ियॉलोजी का अधिकांश ज्ञान दैनिक जीवन और रोगियों के अध्ययन से उपलब्ध हुआ है, परंतु कुछ ज्ञान प्राणियों पर किए गए प्रयोगों से भी उपलब्ध हुआ है। रसायन, भौतिकी, शरीररचना विज्ञान (anatomy) और ऊतकविज्ञान से इसका अत्यंत निकट का संबंध है।

इस प्रकार विश्लेषिक फ़िज़ियॉलोजी, जीवित प्राणियों पर, अथवा उनसे पृथक्कृत भागों पर, जो अनुकूल अवस्था में कुछ समय जीवित रह जाते हैं, किए गए प्रयोगों से प्राप्त ज्ञान से निर्मित है। प्रयोगों से विभिन्न संरचनात्मक भागों के गुण और क्रियाएँ ज्ञात होती हैं। संश्लेषिक फ़िज़ियॉलोजी में हम यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि किस प्रकार संघटनशील प्रक्रमों से शरीर की क्रियाएँ संश्लेषित होकर, विभिन्न भागों की सहकारी प्रक्रियाओं का निर्माण करती हैं और किस प्रकार जीव समष्टि रूप में अपने भिन्न भिन्न अंगों को सम्यक् रूप से समंजित करके, बाह्य परिस्थिति के परिवर्तन पर प्रतिक्रिया करता है।

प्रतिमान (Normal) - संरचना और शरीरक्रियात्मक गुणों में एक ही जाति के प्राणी आपस में बहुत मिलते जुलते हैं और जैव लक्षणों के मानक प्ररूप की ओर उन्मुख यह प्रवृत्ति जीव और उसके वातवरण के बीच सन्निकट सामंजस्य की अभिव्यक्ति है। एक ही जनक से, एक ही समय में, उत्पन्न प्राणियों में यह समानता सर्वाधिक होती है। ज्यों ज्यों हम अन्य जातियों के प्राणियों की समानताओं के संबंध में विचार करते हैं, उनमें भेद बढ़ता जाता है और प्राणियों के वर्गीकरण में जंतुजगत् के छोरों पर स्थित प्राणियों का अंतर इतना अधिक होता है कि उनकी तुलना अस्पष्ट होती है।

फिर भी, व्यष्टि प्राणियों में जहाँ बहुत निकट का संबंध होता है, जैसे मनुष्य जाति में, वहीं इनमें अंतर भी स्पष्ट होता है। सामान्य मानव व्यष्टि का अध्ययन करना, मानव फ़िज़ियॉलोजी का कर्तव्य है, क्योंकि इससे रोग के अध्ययन की महत्वपूर्ण आधारभूमि तैयार होती है, परंतु यह कहना कि किसी प्रस्तुत लक्षण (character) का प्राकृतिक स्वरूप क्या है, कठिन है। इसके अतिरिक्त सभी शरीरक्रियात्मक प्रयोगों के परिणामों में पर्याप्त स्पष्ट अंतर प्रदर्शित होता है, जो प्रयोज्य प्राणियों की व्यत्तिगत प्रकृति पर निर्भर करता है। इसीलिए महत्वपूर्ण समुचित नियंत्रणों का और महत्वपूर्ण परिणाम का अधिमूल्यन नहीं होना चाहिए। प्राय: परिणाम के निश्चय के लिए आदर्श परिणामों का विचार किया जाता है। प्रयोगों की पुनरावृत्तियाँ आवश्यक हैं। प्रेक्षण की त्रुटि, जो यथार्थ विज्ञानों में प्राय: अल्प होती है, जैविकी में बहुत अधिक होती है, क्योंकि परिवर्ती व्यष्टि के कारण प्रेक्षण में परिवर्तनशीलता आ जाती है। जिस प्रकार अन्य विज्ञानों में परिणामों को सांख्यिकी द्वारा विवेचित किया जाता है, वैसे ही फ़िज़ियॉलोजी को परिणामों की संभाविता के नियम की प्रयुक्ति से विवेचित किया जाता है। सीमित संख्या में किए प्रयोगों से निर्णय लेने में बहुत सावधानी इस दृष्टि से अपेक्षित है कि प्राप्त परिणाम नियंत्रित श्रेणियों से भिन्न हैं अथवा नहीं।

कठिनाइयों को दूर करने की एक विधि के रूप में औसतों, अर्थात् समांतर माध्य (arithmetic mean), का आश्रय लिया जाता है, जैसे हम कहते हैं, मानव के किसी समुदाय विशेष में प्रति घन मिलिमीटर रक्त में लाल सेलों की औसत संख्या 5 करोड़ 20 लाख है। यह विधि यद्यपि सबसे तरल और अति व्यवहृत है, परंतु यह इसलिए असंतोषजनक है कि इससे यह ज्ञात नहीं होता कि माध्य से विचलन किस परिमाण में और आपेक्षिक रूप से कितने अधिक बार (relatively frequent) होता है। हमारे पास यह ज्ञात करने का कोई साधन नहीं रह जाता कि उपर्युक्त उदाहरण में 4 करोड़ 50 लाख सामान्य परास के अंदर है या नहीं। परिणामत:, सांख्यिकी के परिणामों की अभिव्यक्ति के लिए अधिक यथार्थ साधन के उपयोग का व्यवहार बढ़ता जा रहा है।

मूल प्राकृतिक घटनाएँ

सभी जीवित जीवों के जीवन की मूल प्राकृतिक घटनाएँ एक सी है। अत्यंत असमान जीवों में क्रियाविज्ञान अपनी समस्याएँ अत्यंत स्पष्ट रूप में उपस्थित करता है। उच्चस्तरीय प्राणियों में शरीर के प्रधान अंगों की क्रियाएँ अत्यंत विशिष्ट होती है, जिससे क्रियाओं के सूक्ष्म विवरण पर ध्यान देने से उन्हें समझना संभव होता है।

निम्नलिखित मूल प्राकृतिक घटनाएँ हैं, जिनसे जीव पहचाने जाते हैं:

(क) संगठन - यह उच्चस्तरीय प्राणियों में अधिक स्पष्ट है। संरचना और क्रिया के विकास में समांतरता होती है, जिससे शरीरक्रियाविदों का यह कथन सिद्ध होता है कि संरचना ही क्रिया का निर्धारक उपादान है। व्यक्ति के विभिन्न भागों में सूक्ष्म सहयोग होता है, जिससे प्राणी की आसपास के वातावरण के अनुकूल बनने की शक्ति बढ़ती है।

(ख) ऊर्जा की खपत - जीव ऊर्जा को विसर्जित करते हैं। मनुष्य का जीवन उन शारीरिक क्रियाकलापों (movements) से, जो उसे पर्यावरण के साथ संबंधित करते हैं निर्मित हैं। इन शारीरिक क्रियाकलापों के लिए ऊर्जा का सतत व्यय आवश्यक है। भोजन अथवा ऑक्सीजन के अभाव में शरीर के क्रियाकलापों का अंत हो जाता है। शरीर में अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होने पर उसकी पूर्ति भोजन एवं ऑक्सीजन की अधिक मात्रा से होती है। अत: जीवन के लिए श्वसन एवं स्वांगीकरण क्रियाएँ आवश्यक हैं। जिन वस्तुओं से हमारे खाद्य पदार्थ बनते हैं, वे ऑक्सीकरण में सक्षम होती हैं। इस ऑक्सीकरण की क्रिया से ऊष्मा उत्पन्न होती है। शरीर में होनेवाली ऑक्सीकरण की क्रिया से ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो जीवित प्राणी की क्रियाशीलता के लिए उपलब्ध रहती है।

(ग) वृद्धि और जनन - यदि उपचयी (anabolic) प्रक्रम प्रधान है, तो वृद्धि होती है, जिसके साथ क्षतिपूर्ति की शक्ति जुड़ी हुई है। वृद्धि का प्रक्रम एक निश्चित समय तक चलता है, जिसके बाद प्रत्येक जीव विभक्त होता है और उसका एक अंश अलग होकर एक या अनेक नए व्यक्तियों का निर्माण करता है। इनमें प्रत्येक उन सभी गुणों से युक्त होता है जो मूल जीव में होते हैं। सभी उच्च कोटि के जीवों में मूल जीव क्षयशील होने लगता है और अंतत: मृत्यु को प्राप्त होता है।

(घ) अनुकूलन (Adaptation) - सभी जीवित जीवों में एक सामान्य लक्षण होता है, वह है अनुकूलन का सामथ्र्य। आंतर संबंध तथा बाह्य संबंधों के सतत समन्वय का नाम अनुकूलन है। जीवित कोशिकाओं का वास्तविक वातावरण वह ऊतक तरल (tise fluid) है, जिसमें वे रहती हैं। यह आंतर वातावरण, प्राणी के सामान्य वातावरण में होनेवाले परिवर्तनों से प्रभावित होता है। जीव की अतिजीविता (survival) के लिए वातावरण के परिवर्तनों को प्रभावहीन करना आवश्यक है, जिससे सामान्य वातावरण चाहे जैसा हो, आंतर वातावरण जीने योग्य सीमाओं में रहे। यही अनुकूलन है।

चिकित्साप्रणाली

चिकित्सापद्धति का केंद्रस्तंभ वह सामान्य चिकित्सक (जेनरल प्रैक्टिशनर) है जो जनता या परिवारों के घनिष्ठ संपर्क में रहता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उनकी सहायता करता है। वह अपने रोगियों का मित्र तथा परामर्शदाता होता है और समय पर उन्हें दार्शनिक सांत्वना देने का प्रयत्न करता है। वह रोग संबंधी साधारण समस्याओं से परिचित होता है तथा दूरवर्ती स्थानों, गाँवों इत्यादि, में जाकर रोगियों की सेवा करता है। यहाँ उसको सहायता के वे सब उपकरण नहीं प्राप्त होते जो उसने शिक्षण काल में देखे थे और जिनका प्रयोग उसने सीखा था। बड़े नगरों में ये बहुत कुछ उपलब्ध हो जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर उसको विशेषज्ञ से सहायता लेनी पड़ती है या रोगी को अस्पताल में भेजना होता है। आजकल इस विज्ञान की किसी एक शाखा का विशेष अध्ययन करके कुछ चिकित्सक विशेषज्ञ हो जाते हैं। इस प्रकार हृदयरोग, मानसिक रोग, अस्थिरोग, बालरोग आदि में विशेषज्ञों द्वारा विशिष्ट चिकित्सा उपलब्ध है।

आजकल चिकित्सा का व्यय बहुत बढ़ गया है। रोग के निदान के लिए आवश्यक परीक्षाएँ, मूल्यवान् औषधियाँ, चिकित्सा की विधियाँ और उपकरण इसके मुख्य कारण हैं। आधुनिक आयुर्विज्ञान के कारण जनता का जीवनकाल भी बढ़ गया है, परंतु औषधियों पर बहुत व्यय होता है। खेद है कि वर्तमान आर्थिक दशाओं के कारण उचित उपचार साधारण मनुष्य की सामथ्र्य के बाहर हो गया है।

आयुर्विज्ञान सम्पादन (अनुभाग)

== आयुर्विज्ञान की शिक्षा ==
प्रत्येक शिक्षा का ध्येय मनुष्य का मानसिक विकास होता है, जिससे उसमें तर्क करके समझने और तदनुसार अपने भावों को प्रकट करने तथा कार्यान्वित करने की शक्ति उत्पन्न हो जाय। आयुर्विज्ञान की शिक्षा का भी यही उद्देश्य है। इसके लिए सब आयुर्विज्ञान के विद्यार्थियों में विद्यार्थी को उपस्नातक के रूप में पाँच वर्ष बिताने पड़ते हैं। मेडिकल कॉलेजों (आयुर्विज्ञान विद्यालयों) में विद्यार्थियों को आधार विज्ञानों का अध्ययन करके उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने पर भरती किया जाता है। तत्पश्चात् प्रथम दो वर्ष विद्यार्थी शरीररचना तथा शरीरक्रिया नामक आधारविज्ञानों का अध्ययन करता है जिससे उसको शरीर की स्वाभाविक दशा का ज्ञान हो जाता है। इसके पश्चात् तीन वर्ष रोगों के कारण इन स्वाभाविक दशाओं की विकृतियाँ का ज्ञान पाने तथा उनकी चिकित्सा की रीति सीखने में व्यतीत होते हैं। रोगों को रोकने के उपाय तथा भेषजवैधिक का भी, जो इस विज्ञान की नीति संबंधी शाखा है, वह इसी काल में अध्ययन करता है। इन पाँच वर्षों के अध्ययन के पश्चात् वह स्नातक बनता है। इसके पश्चात् वह एक वर्ष तक अपनी रुचि के अनुसार किसी विभाग में काम करता है और उस विषय का क्रियात्मक ज्ञान प्राप्त करता है। तत्पश्चात् वह स्नातकोत्तर शिक्षण में डिप्लोमा या डिग्री लेने के लिए किसी विभाग में भरती हो सकता है।

सब आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) किसी न किसी विश्वविद्यालय से संबंधित होते हैं जो उनकी परीक्षाओं तथा शिक्षणक्रम का संचालन करता है और जिसका उद्देश्य विज्ञान के विद्यार्थियों में तर्क की शक्ति उत्पन्न करना और विज्ञान के नए रहस्यों का उद्घाटन करना होता है। आयुर्विज्ञान विद्यालयों (मेडिकल कॉलेजों) के प्रत्येक शिक्षक तथा विद्यार्थी का भी उद्देश्य यही होना चाहिए कि उसे रोगनिवारक नई वस्तुओं की खोज करके इस आर्तिनाशक कला की उन्नति करने की चेष्टा करनी चाहिए। इतना ही नहीं, शिक्षकों का जीवनलक्ष्य यह भी होना चाहिए कि वह ऐसे अन्वेषक उत्पन्न करें।

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