नई दिल्ली। यदि आप इंटरनेट ब्राउजिंग पर समय बिताते हैं, तो आप फेसबुक की निगरानी में हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपका फेसबुक अकाउंट है या नहीं। या फिर आपने उसपर लॉग इन किया है या नहीं।
सुनकर हैरानी जरूर होगी, लेकिन यह सच है। ब्रिटेन की एक आईटी संस्था द्वारा किए गए अध्ययन और जांच में यह बात सामने आई है कि फेसबुक हर यूजर को ब्राउजिंग के दौरान ट्रैक करता रहता है। जैसे ही आप इंटरनेट खोलते हैं, फेसबुक आपके सिस्टम में बनने वाली कुकीज के जरिए इस बात की निगरानी करने लगता है कि आप किस वेबसाइट पर जा रहे हैं? कहां क्लिक कर रहे हैं? और क्या तलाश रहे हैं?
फेसबुक क्यों करता है जासूसी
फेसबुक हर यूजर के सिस्टम में सेव हुई कुकीज फाइलों के जरिए उसकी रुचि, जरूरत और इच्छाओं के बारे में पता लगाता है। यह जानने के लिए एफबी हर यूजर की सर्च हिस्ट्री का पता भी लगाता रहता है।
जैसे ही फेसबुक को यह पता चल जाता है कि आप किस तरह की सूचनाओं को एक्सेस कर रहे हैं अथवा किसी तरह के उत्पादो के बारे में सर्च कर रहे हैं। वह आपको उन्हीं प्रोडक्ट के विज्ञापन दिखाना शुरू कर देता है।
कहने का अर्थ यह है कि फेसबुक विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन कंपनियों को अपने यूजर की डिमांड बेचता है।
क्या होती है कुकीज
कुकीज वो फाइलें होती हैं जो किसी भी यूजर द्वारा पिछली बार उपयोग किए गए इंटरनेट की हिस्ट्री को बताती हैं। जैसे ही आप कंप्यूटर पर लॉग इन करते हैं तो फेसबुक का सोशल प्लग इन्हें डिटेक्ट करता है और कुकीज फाइलें फेसबुक को भेजता है। इस तरह से आपकी निगरानी होती है।
भले ही फिर फेसबुक पर आपका अकाउंट न हो, और आपने फेसबुक पेज न खोला हो। पूरी दुनिया में फेसबुक यूजर्स की संख्या रोजाना बढ़ रही है और यह संख्या 1.5 बिलियन से ज्यादा हो चुकी है।
फेसबुक अपने प्रत्येक यूजर की हर लाइक के जरिए लगभग एक करोड़ 30 लाख वेबसाइट्स से जुड़ा है। इसमें कई हेल्थ और सरकारी वेबसाइट भी शामिल हैं।
अब ‘आत्महत्या’ को भी रोकेगा फेसबुक
सुनकर हैरानी जरूर होगी, लेकिन यह सच है। ब्रिटेन की एक आईटी संस्था द्वारा किए गए अध्ययन और जांच में यह बात सामने आई है कि फेसबुक हर यूजर को ब्राउजिंग के दौरान ट्रैक करता रहता है। जैसे ही आप इंटरनेट खोलते हैं, फेसबुक आपके सिस्टम में बनने वाली कुकीज के जरिए इस बात की निगरानी करने लगता है कि आप किस वेबसाइट पर जा रहे हैं? कहां क्लिक कर रहे हैं? और क्या तलाश रहे हैं?
फेसबुक क्यों करता है जासूसी
फेसबुक हर यूजर के सिस्टम में सेव हुई कुकीज फाइलों के जरिए उसकी रुचि, जरूरत और इच्छाओं के बारे में पता लगाता है। यह जानने के लिए एफबी हर यूजर की सर्च हिस्ट्री का पता भी लगाता रहता है।
जैसे ही फेसबुक को यह पता चल जाता है कि आप किस तरह की सूचनाओं को एक्सेस कर रहे हैं अथवा किसी तरह के उत्पादो के बारे में सर्च कर रहे हैं। वह आपको उन्हीं प्रोडक्ट के विज्ञापन दिखाना शुरू कर देता है।
कहने का अर्थ यह है कि फेसबुक विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन कंपनियों को अपने यूजर की डिमांड बेचता है।
क्या होती है कुकीज
कुकीज वो फाइलें होती हैं जो किसी भी यूजर द्वारा पिछली बार उपयोग किए गए इंटरनेट की हिस्ट्री को बताती हैं। जैसे ही आप कंप्यूटर पर लॉग इन करते हैं तो फेसबुक का सोशल प्लग इन्हें डिटेक्ट करता है और कुकीज फाइलें फेसबुक को भेजता है। इस तरह से आपकी निगरानी होती है।
भले ही फिर फेसबुक पर आपका अकाउंट न हो, और आपने फेसबुक पेज न खोला हो। पूरी दुनिया में फेसबुक यूजर्स की संख्या रोजाना बढ़ रही है और यह संख्या 1.5 बिलियन से ज्यादा हो चुकी है।
फेसबुक अपने प्रत्येक यूजर की हर लाइक के जरिए लगभग एक करोड़ 30 लाख वेबसाइट्स से जुड़ा है। इसमें कई हेल्थ और सरकारी वेबसाइट भी शामिल हैं।
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