क्या ऐसा संभव हो सकता है कि दिल्ली और मुंबई के बीच 1400 किलोमीटर की दूरी को ट्रेन के ज़रिए सिर्फ सवा दो घंटे में नाप दिया जाए। आप कहेंगे, दोनों शहरों के बीच की दूरी तो इतने वक्त में विमान से तय होती है। लेकिन जनाब ट्रेन के ज़रिए भी इतनी दूरी नापना संभव है। दुनिया की सबसे तेज़ रफ्तार मैग्लेव ट्रेन ने मंगलवार को जापान में 603 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़कर सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह टेस्ट रन टोक्यो और सेंट्रल सिटी नागोया के बीच मैग्लेव ट्रेन चलाने के लिए किया गया। यह सेवा 2027 तक शुरू करनी है। टोक्यो और नागोया के बीच की दूरी 280 किलोमीटर है। इससे दोनों शहरों के बीच 280 किलोमीटर की दूरी घटकर 40 मिनट रह जाएगी। अभी इसमें 80 मिनट से ज्यादा वक्त लगता है। जापान इस प्रोजेक्ट पर 100 अरब डॉलर खर्च कर रहा है।
मैग्नेटिक पावर से ट्रैक से दस सेंटीमीटर ऊपर रह कर चलने वाली इस ट्रेन का टेस्ट रन टोक्यो के दक्षिण में लगभग 80 किमी दूर माउंट फिजी के पास किया गया।
जापान में इस तकनीक पर पिछले 10 साल से काम हो रहा है। मेग्लेव ट्रेन सामान्य तौर पर 400 से 500 किलोमीटर/घंटा की रफ्तार से चलाई जा सकती हैं। पूरी तरह इलेक्ट्रोमेग्नेटिक सस्पेंशन पर काम करती है। इसमें कोई इंजन नहीं होता। इंजन की जगह एक कंट्रोल सिस्टम होता है। यह मैग्नेटिक ट्रैक और मैग्नेटिक गाइडेड दीवारों के सहारे ऑपरेट होता है। मैग्नेटिक ट्रैक और मैग्नेटिक गाइडेड वॉल ट्रेन के डिब्बों को हवा में 1 से 4 इंच तक ऊपर उठा देती हैं। इससे मेग्लेव ट्रेन में आम ट्रेनों की तरह फ्रिक्शन नहीं होता। फ्रिक्शन नहीं होने से ट्रेन की रफ्तार बढ़ती चली जाती है। ट्रेनों के आसपास गाइडेड दीवारों में इस तरह का मैग्नेटिक फील्ड तैयार होता चला जाता है कि ट्रेन आगे बढ़ जाती है।
बोइंग-777 विमान की अधिकतम रफ्तार 562 मील/घंटा या 905 किमी/घंटा होती है। मैग्लेव ट्रेन ने बोइंग की दो तिहाई रफ्तार तो मैग्नेटिकट ट्रैक पर हासिल कर ली है।
मैग्नेटिक पावर से ट्रैक से दस सेंटीमीटर ऊपर रह कर चलने वाली इस ट्रेन का टेस्ट रन टोक्यो के दक्षिण में लगभग 80 किमी दूर माउंट फिजी के पास किया गया।
जापान में इस तकनीक पर पिछले 10 साल से काम हो रहा है। मेग्लेव ट्रेन सामान्य तौर पर 400 से 500 किलोमीटर/घंटा की रफ्तार से चलाई जा सकती हैं। पूरी तरह इलेक्ट्रोमेग्नेटिक सस्पेंशन पर काम करती है। इसमें कोई इंजन नहीं होता। इंजन की जगह एक कंट्रोल सिस्टम होता है। यह मैग्नेटिक ट्रैक और मैग्नेटिक गाइडेड दीवारों के सहारे ऑपरेट होता है। मैग्नेटिक ट्रैक और मैग्नेटिक गाइडेड वॉल ट्रेन के डिब्बों को हवा में 1 से 4 इंच तक ऊपर उठा देती हैं। इससे मेग्लेव ट्रेन में आम ट्रेनों की तरह फ्रिक्शन नहीं होता। फ्रिक्शन नहीं होने से ट्रेन की रफ्तार बढ़ती चली जाती है। ट्रेनों के आसपास गाइडेड दीवारों में इस तरह का मैग्नेटिक फील्ड तैयार होता चला जाता है कि ट्रेन आगे बढ़ जाती है।
बोइंग-777 विमान की अधिकतम रफ्तार 562 मील/घंटा या 905 किमी/घंटा होती है। मैग्लेव ट्रेन ने बोइंग की दो तिहाई रफ्तार तो मैग्नेटिकट ट्रैक पर हासिल कर ली है।


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