भूकंप से बुरी तरह प्रभावित नेपाल में बचाव के काम में इनसान के सबसे 'वफ़ादार माने जाने वाले दोस्त' भी पूरी शिद्दत के साथ जुटे हुए हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं उन प्रशिक्षित कुत्तों की जिन्हें भारत, फ्रांस और स्पेन से विशेष तौर पर बचाव कार्य में लगाया गया है। इन कुत्तों को मलबे के नीचे दबे हुए जीवित लोगों को ढूंढ निकालने में महारत हासिल है।
भारत से एनडीआरएफ की टीमों के साथ खास तौर पर इस तरह के प्रशिक्षित कुत्तों को भी नेपाल लाया गया है।
फ्रांस और स्पेन से 15 लोगों की टीम छह प्रशिक्षित कुत्तों के साथ बचाव कार्य के लिए नेपाल पहुंची है।
गोल्डन रिट्राइवर और जर्मन शेपर्ड नस्ल के इन कुत्तों को मलबे के पास ले जाया जाता है तो इनकी सक्रियता तब देखते बनती है जब इन्हें किसी जीवित व्यक्ति के फंसे होने का आभास होता है।
इन कुत्तों को विमान पर लंबी हवाई यात्रा के दौरान लाते समय विशेष ध्यान बरता जाता है। इन्हें खास तौर पर बनाए गए सुविधाजनक केबिन्स में लाया जाता है जिससे लंबी हवाई यात्रा का इन पर असर ना पड़े।
भारत से एनडीआरएफ की टीमों के साथ खास तौर पर इस तरह के प्रशिक्षित कुत्तों को भी नेपाल लाया गया है।
फ्रांस और स्पेन से 15 लोगों की टीम छह प्रशिक्षित कुत्तों के साथ बचाव कार्य के लिए नेपाल पहुंची है।
गोल्डन रिट्राइवर और जर्मन शेपर्ड नस्ल के इन कुत्तों को मलबे के पास ले जाया जाता है तो इनकी सक्रियता तब देखते बनती है जब इन्हें किसी जीवित व्यक्ति के फंसे होने का आभास होता है।इन कुत्तों को विमान पर लंबी हवाई यात्रा के दौरान लाते समय विशेष ध्यान बरता जाता है। इन्हें खास तौर पर बनाए गए सुविधाजनक केबिन्स में लाया जाता है जिससे लंबी हवाई यात्रा का इन पर असर ना पड़े।


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