Monday, April 27, 2015

बिनासकारी भुकम्प ने नेपाल और भारतमे हजारौ लोगौकी मौत

देश के कम से कम 38 शहर बेहद जोखिम वाले भूकंप क्षेत्र में स्थित हैं और देश का 60 फीसदी भौगोलिक हिस्सा भूकंप की चपेट में आ सकता है.
दिल्ली मेट्रो जैसे कुछ प्रोजेक्ट को छोड़ दिया जाए, तो शहरों की अधिकांश संरचना तेज भूकंप को झेलने में सक्षम नहीं है और ऐसे में इन शहरों में भूकंप आने पर बड़ी तबाही हो सकती है.




नेपाल में आए भूकंप का अंदाजा भूवैज्ञानिकों को पहले से ही था, जिन्होंने एशिया की में भारतीय उपमहाद्वीप के लगातार पड़ रहे दबाव के चलते हिमालयी क्षेत्र में और भी भूकंप आने की चेतावनी दी है.

भूकंप रोधी मकान के लिए बाध्यकारी निर्देश नहीं
भारतीय मानक ब्यूरो ने 1962 में पहली बार 'भूकंप रोधी डिजाइन के लिए भारतीय मानक शर्त' का प्रकाशन किया था, जिसमें ताजा संशोधन 2005 में किया गया है. इसकी सिफारिश के मुताबिक देश के कम ही मकान बने हुए हैं. ये मानक बाध्यकारी नहीं है. इसलिए किसी को पता नहीं है कि भूकंप-रोधी आवासीय मकान बनाने के लिए कोई दिशा-निर्देश है.

दिल्ली मेट्रो का स्ट्रक्चर भूकंप झेलने में सक्षम है और ऐसी कुछ ही संरचनाएं हैं. भुज में 2001 का भूकंप आने के बाद बने मकान इस मानक पर आधारित हैं.



महाराष्ट्र के लातूर में 1993 में आए 6.4 तीव्रता के भूकंप में करीब 10 हजार लोग मारे गए थे, जबकि इस क्षेत्र को भूकंप वाला क्षेत्र नहीं माना जाता है. इस भूकंप में ज्यादातर लोग इसलिए मारे गए, क्योंकि मकानों की संरचना भूकंप झेलने के लायक नहीं थी. इसी वजह से गुजरात में भी लोग मारे गए थे.

38 शहरों के मकान भूकंप झेलने लायक नहीं
भारत सरकार ने अभी भूकंप क्षेत्र में पड़ने वाले 38 प्रमुख शहरों की सूची बनाई है. गृह मंत्रालय के लिए 2006 में संयुक्त राष्ट्र की ओर से तैयार की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'इन शहरों के अधिकतर मकान भूकंप झेलने में सक्षम नहीं हैं. इसलिए इनमें से किसी भी शहर में भूकंप आने पर बड़ी तबाही हो सकती है.'

भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, भूखंड एक विशाल पट्टी पर तैरता है. ये पट्टियां लगातार खिसकती रहती हैं, जिससे भूकंप आते हैं. छोटे झटके हम महसूस नहीं कर पाते, लेकिन बड़े झटके हमें हिला देते हैं. हिमालय और उत्तर भारत खास तौर से भूकंप वाले क्षेत्र में पड़ता है. इंसान का अस्तित्व पैदा होने से बहुत पहले एक विशाल महाद्वीप गोंडवाना से टूटकर भारत अलग हुआ था.

भारतीय पट्टी उत्तर की ओर खिसकती हुई करीब 2000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए यूरेशियन पट्टी से टकरा गई. इसी टकराव से हिमालय बना.

60 फीसदी हिस्से में आ सकता है भूकंप
भारत अब भी एशिया की मुख्य भूमि पर सालाना 5 सेंटीमीटर की दर से दबाव डाल रहा है. हाल में सबसे बड़ा भूकंप 2005 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आया था, जो भारत और यूरेशियाई पट्टी के टकराव के शीर्ष पर स्थित है. इस भूकंप में करीब 80 हजार लोग मारे गए थे.

भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर की ओर पड़ने वाले दबाव के कारण देश का 60 फीसदी हिस्सा भूकंप की चपेट में आ सकता है. गुजरात में 2001 में आए भूकंप में करीब 20 हजार लोग मारे गए थे. इसके बाद 2004 में सुनामी इसलिए पैदा हुई थी, क्योंकि भारतीय पट्टी और बर्मा पट्टी का जोड़दार घर्षण हुआ था. बर्मा पट्टी पर ही अंडमान निकोबार द्वीप स्थित है. इस घर्षण के कारण 9.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जो तीसरा सबसे भयानक भूकंप था.

इसके कारण धरती की सतह 100 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में टूट कर ऊपर उठ गई. इससे एक विशाल जल राशि में उछाल आया, जिससे पैदा हुई सुनामी में 14 देशों में करीब 2,30,000 लोग मारे गए.

दिल्ली जोन-4 में, मुंबई-कोलकाता जोन-3 में
अभी तक देश के प्रमुख शहर में बड़ा भूकंप नहीं आया है, लेकिन दिल्ली भूकंप जोन-4 में स्थित है. श्रीनगर और गुवाहाटी भूकंप क्षेत्र-5 में स्थित है. मुंबई, कोलकाता और चेन्नई भूकंप जोन-3 में स्थित है. ऐतिहासिक संकेतों के मुताबिक एक भयानक भूकंप कभी भी आ सकता है. यह सबक बिहार में 1934 और असम में 1950 में आए भूकंप से मिलता है.

बिहार के 1934 के 8.4 तीव्रता के भूकंप का केंद्र हिमालय से 10 किलोमीटर दक्षिण में था. इसका झटका मुंबई और ल्हासा तक महसूस किया गया था. इसमें बिहार के अधिकतर जिले के करीब सभी बड़े मकान धाराशायी हो गए थे. कोलकाता में भी कई मकान ध्वस्त हो गए थे. इस आपदा में 8,100 लोग मारे गए थे. इस पर महात्मा गांधी ने कहा था कि यह छुआछूत के पाप की सजा है.

भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, 1950 के असम के भूकंप ने हिमालय में एक बड़े भूकंप की जमीन तैयार कर दी है. इस भूकंप के बाद 65 साल बीत गए हैं और संभव है कि कोई विकराल भूकंप आने ही वाला हो.

Tuesday, April 21, 2015

फेसबुक यूज करने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर

फेसबुक का इस्तेमाल करने से आपके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है या इसके लक्षण को और भी खराब कर सकता है। एक शोध के अनुसार में यह बात कही गई है। साथ ही शोध में फेसबुक को ध्यान से इस्तेमाल करने की बात भी कही गई है।
शोध में शामिल लोगों का कहना था कि फेसबुक प्रोफाईल होने से उनको अपनी पहचान बनाने में मदद मिलीं साथ ही मानसिक बीमारी से भी उभर पाए वहीं कुछ का कहना था कि फेसबुक का इस्तेमाल करने से उनकी हालत और भी खराब हुई।
एक कार्यक्रम में रिसर्चर कीलिन होवार्ड ने कहा कि फेसबुक का इस्तेमाल करने से या तो सि्थ्ित में सुधार आ सकता है या इसका बुरा असर पड़ सकता है।
यह रियर्च 20 लोगों पर 23 से 68 उम्र के बीच वालों पर किया गया जो शिकीजोफेरिनिया, बाईपोलर डीसआर्डर और डीप्रैशन और एनशाईटी जैसी बीमारी से गुजर चुकें हैं।
हलांकि, समय के साथ बहुत से लोग फेसबुक का बुद्दिमानी से इस्तेमाल करना भी सीखे।रिसर्च में शामिल सभी प्रतिभागियों ने अनुभव होने पर फेसबुक का इस्तेमाल बड़े अच्छे ढंग से किया।

लंच करने के बाद भूल कर भी ना करें ये गलतियां

क्‍या आप भी लंच करने के बाद तुरंत ठहलने के लिये निकल जाते हैं? अगर हां तो इसे तुरंत बंद कर दें। यह आपकी सेहत के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। ऐसे कई आदतें हैं जो लोग खाने के बाद अक्सर करते हैं।

एक्‍सपर्ट के मुताबिक हमें लंच करने के तुरंत बाद टहलना नहीं चाहिए। दोपहर को खाना खाने के बाद 15-20 मिनट तक आराम करना जरुरी है।

आइये जानते हैं कि लंच के बाद कई लोग क्‍या क्‍या गलतियां करते हैं , जिससे उनके हाजमें पर बुरा असर पड़ता है।

ब्रश करना-लंच करने के बाद ब्रश बिल्‍कुल नहीं करना चाहिये। अगर आपने कोई सिट्रस वाला आहार खाया है तो दांतों को ब्रश करने से दांतों की परत तुरंत उतर जाएगी, जिसे हम इनेमल कहते हैं।

बहुत ज्‍यादा पानी-पीना अगर आप खाना खाने के बाद बहुत ज्‍यादा पानी पीते हैं तो इससे आपका पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इससे पेट की कई बीमारियां भी हो सकती हैं।


धूम्रपान करना-लंच करने के बाद शरीर का ब्‍लड सर्कुलेशन तेज होता है। पर जब उसके बाद आप धूम्रपान करते हैं उसका धुंआ आराम से आपके शरीर में घुस कर फेफड़ों और किडनियों को नुकसान पहुंचाता है।


वॉक पर जाना-लंच करने के सीधे बाद वॉक पर जाने से खाने का पोषण शरीर में अच्‍छी तहर से नहीं समा पाता।

हफ्ते में 50-60 घंटे काम करते हैं फेसबुक संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग

फेसबुक यूज़र्स के लिए मंगलवार को सुखद अनुभव रहा कि उन्हें फेसबुक संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग से सवालों के जवाब मिले। एक घंटे के Q&A सेशन में मार्क के जवाबों को बड़ी संख्या में लोगों ने लाइक किया। मार्क ने मशहूर पॉप गायिका शकीरा और वर्जिन ग्रुप के संस्थापक रिचर्ड ब्रैनसन जैसे सेलेब्रिटी समेत कुल 16 लोगों के सवालों के जवाब दिए।

मार्क ज़ुकरबर्ग से पूछा गया कि फेसबुक पर डिसलाइक बटन कब शुरू होगा तो उन्होंने इस सवाल की अनदेखी की। मार्क से एक सवाल किया गया कि वे हफ्ते में कितने घंटे काम करते हैं। इस पर उनका जवाब था- "अगर आप ऑफिस की बात कर रहे हैं तो मैं हफ्ते में 50 से 60 घंटे वहां रहता हूं। हां अगर आप काम पर फोकस के बारे में कहे तो उसे तो आप मेरा पूरा जीवन काल ही कह सकते हैं।" उनके निजी जीवन के संबंध में भी सवाल पूछे गए। किसी ने मार्क से यह पूछा कि वे अक्सर ग्रे कलर की शर्ट पहनते हैं, क्या दूसरे रंग उन्हें पसंद नहीं आते? किसी ने उनके कुत्ते के बारे में सवाल पूछा। मार्क से ये भी पूछा गया कि फेसबुक का भविष्य वो कैसा देखते हैं?

मशहूर गायिका शकीरा ने मार्क से सवाल किया, "आप हमें यह बतायें कि वंचित समुदाय के लोगों को शिक्षा देने के लिए टेक्नोलॉजी को किस तरह उपयोगी उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है? इस सवाल का जवाब मार्क ने दिया- "यह सवाल पूछने के लिए आपका धन्यवाद। मैं व्यक्तिगत सीखने को लेकर बहुत उत्साहित हूं। तकनीक का इस्तेमाल अगर व्यक्तिगत शिक्षा के लिए हो, तो बहुत अच्छा रहता है। आजकल कई ऐसे महान स्कूल हैं, जहां टेक्नोलॉजी के जरिये अलग तरह की शिक्षा देने की कोशिश हो रही है। मैं खुद भी इसके लिए प्रयासरत हूं। फेसबुक के जरिये भी सॉफ्टवेयर ऐसे टूल के निर्माण में मदद कर रहा है।"

रिचर्ड ब्रैनसन ने मार्क से यह सवाल किया- "दुनिया के वैसे दो तिहाई लोग जिनके पास इंटरनेट की पहुंच नहीं है, उनके साथ संबंध बनाना कितना कठिन है? इस संबंध में मैं आपकी राय जानना चाहता हूं?"

मार्क ने जवाब में लिखा, "आज जब हम बात करते हैं पूरी दुनिया को जोड़ने की, तो लोग उनके फायदे शिक्षा, स्वास्थ्य और कैरियर से जोड़कर देखते हैं। लेकिन एक चीज को हम भूल जाते हैं और चर्चा में उसपर ध्यान नहीं देते हैं कि जो पहले से कनेक्टेड है वह दूसरों के साथ जुड़ने का फायदा उठा रहे हैं। जरा उनके बारे में सोचें, जिनके पास पूरी दुनिया को बदलने के लिए महान विचार और आइडिया हैं। अगर हम जनसंख्या को पैमाना मानें, तो ऐसे लोगों की दो तिहाई आबादी के पास इंटरनेट कनेक्शन नहीं है, लेकिन जैसे ही वे कनेक्टेड होंगे, पूरी दुनिया को इसका फायदा मिलेगा।"

ट्रेन है या विमान! एक घंटे में 603 किमी की रफ्तार

क्या ऐसा संभव हो सकता है कि दिल्ली और मुंबई के बीच 1400 किलोमीटर की दूरी को ट्रेन के ज़रिए सिर्फ सवा दो घंटे में नाप दिया जाए। आप कहेंगे, दोनों शहरों के बीच की दूरी तो इतने वक्त में विमान से तय होती है। लेकिन जनाब ट्रेन के ज़रिए भी इतनी दूरी नापना संभव है। दुनिया की सबसे तेज़ रफ्तार मैग्लेव ट्रेन ने मंगलवार को जापान में 603 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़कर सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह टेस्‍ट रन टोक्यो और सेंट्रल सिटी नागोया के बीच मैग्‍लेव ट्रेन चलाने के लिए किया गया। यह सेवा 2027 तक शुरू करनी है। टोक्‍यो और नागोया के बीच की दूरी 280 किलोमीटर है। इससे दोनों शहरों के बीच 280 किलोमीटर की दूरी घटकर 40 मिनट रह जाएगी। अभी इसमें 80 मिनट से ज्यादा वक्त लगता है। जापान इस प्रोजेक्ट पर 100 अरब डॉलर खर्च कर रहा है।

मैग्‍नेटिक पावर से ट्रैक से दस सेंटीमीटर ऊपर रह कर चलने वाली इस ट्रेन का टेस्ट रन टोक्यो के दक्षिण में लगभग 80 किमी दूर माउंट फिजी के पास किया गया।

जापान में इस तकनीक पर पिछले 10 साल से काम हो रहा है। मेग्लेव ट्रेन सामान्य तौर पर 400 से 500 किलोमीटर/घंटा की रफ्तार से चलाई जा सकती हैं। पूरी तरह इलेक्ट्रोमेग्नेटिक सस्पेंशन पर काम करती है। इसमें कोई इंजन नहीं होता। इंजन की जगह एक कंट्रोल सिस्टम होता है। यह मैग्नेटिक ट्रैक और मैग्नेटिक गाइडेड दीवारों के सहारे ऑपरेट होता है। मैग्नेटिक ट्रैक और मैग्नेटिक गाइडेड वॉल ट्रेन के डिब्बों को हवा में 1 से 4 इंच तक ऊपर उठा देती हैं। इससे मेग्लेव ट्रेन में आम ट्रेनों की तरह फ्रिक्शन नहीं होता। फ्रिक्शन नहीं होने से ट्रेन की रफ्तार बढ़ती चली जाती है। ट्रेनों के आसपास गाइडेड दीवारों में इस तरह का मैग्नेटिक फील्ड तैयार होता चला जाता है कि ट्रेन आगे बढ़ जाती है।

बोइंग-777 विमान की अधिकतम रफ्तार 562 मील/घंटा या 905 किमी/घंटा होती है। मैग्लेव ट्रेन ने बोइंग की दो तिहाई रफ्तार तो मैग्नेटिकट ट्रैक पर हासिल कर ली है।

मंगलवार का दिन सलमान खान के लिए अहम

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के लिये कल (21 अप्रैल) का दिन खासा महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस 13 साल पुराने हिट एंड रन मामले में मंगलवार को कोर्ट अपना फैसला सुनायेगी।

दरअसल, सलमान पर आरोप है कि 28 सितंबर साल 2002 को अपनी लैंड क्रूजर गाड़ी से अपने घर बांद्रा लौट रहे थे। रात करीब दो बजे अमेरिकन बेकरी के पास सलमान की तेज रफ्तार गाड़ी ने फुटपाथ पर सो रहे पांच लोगों को कुचल दिया, जिसमें से एक शख्स की मौत हो गई। जबकि चार अन्य लोग घायल हुये थे।

अभियोजन पक्ष का दावा है कि हादसे के वक्त सलमान ही गाड़ी चला रहे थे और नशे में थे। हालांकि, सलमान ने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उधर, उनके ड्राइवर अशोक सिंह ने कोर्ट में बयान दिया कराया कि वारदात के दिन गाड़ी सलमान नहीं वो खुद ही चला रहे थे।

सलमान पर आरोप :-

हिट एंड रन मामले में अभियोजन पक्ष ने दो दर्जन से अधिक गवाहों को कोर्ट में पेश किया है। उधर, बचाव पक्ष ने केवल एक गवाह ही पेश किया। सलमान का ड्राइवर अशोक सिंह की गवाही खासी अहम है।

बॉलीवुड एक्टर पर आरोप है कि उसने अपनी टोयोटा लैंड क्रूजर को 28 सितम्बर 2002 को बांद्रा में एक बेकरी में घुसा दी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य जख्मी हो गये थे। सलमान पर ‘गैर इरादतन हत्या’ के आरोप लगे हैं। कानून के जानकारों के मुताबिक, ऐसे मामलों में दस वर्ष कैद तक की सजा हो सकती है।

'खून का नमूना सलमान का नहीं'

अभिनेता सलमान के वकील ने घटना के समय नशे में होने के दावे को खारिज कर दिया। दरअसल, अभियोजन पक्ष का आरोप था कि सलमान शराब के नशे में गाड़ी चला रहे थे। वकील ने दावा किया कि जांच के लिए भेजे गये खून के नमूने सलमान के थे ही नहीं।

'सलमान ही कार चला रहे थे'

'हिट एंड रन' में बचाव पक्ष का दावा है कि हादसे के वक्त उनका ड्राइवर टोयोटा लैंड कू्रजर चला रहा था। लेकिन, अभियोजन पक्ष का दावा है कि हादसे के वक्त सलमान ही ड्राइविंग सीट पर बैठे थे।

खुशखबरी! मारुति आल्‍टो की कीमत पर मिलेगी यह शानदार कार

अगर आप हाल ही में छोटे बजट की कार खरीदने की सोच रहे हैं और आपका बजट इसकी इजाजत नहीं दे रहा है तो शायद यह खबर आपके लिए खुशखबरी लेकर आ सकती है। जापान की कार निर्माता कंपनी निसान डटसन भारतीय बाजार में सस्‍ती कार लाने जा रहा है।


खबर के अनुसार, मारुति को टक्‍कर देने के लिए डटसन ने एक छोटी और सस्‍ती कार बाजार में पेश की है जिसकी कीमत 2.5 लाख रुपये हो सकती है। यह कार रेनो-निसान अलायंस वाले सीएमएफ-ए प्लेटफॉर्म पर बनी है। इसमें बॉडी डिजाइन डटसन रेडी-गो कंसेप्ट वाला दिया गया है। भारत में यह कार मारुति अल्टो तथा ह्युंडई जैसी कारों को चुनौती देगी।
निसान डटसन की यह कार भारत में ही तैयार की जा रही है। लोकल पार्टस और कंपोनेंट्स काम में लिए जाने के कारण इसकी कीमत कम होगी। कंपनी के मुताबिक इसे रेनो-निसान अलायंस की चेन्नई स्थित मैन्युफेक्चरिंग प्लांट पर ही बनाया जा रहा है। निसान के मुताबिक, भारतीय बाजार में ये कार अगले 18 महीनों में उपलब्ध होगी। फिलहाल इसकी टेस्टिंग की जा रही है। कंपनी ने निसान डटसन रेडी गो का डिजाइन हाल ही में पेश किया है। साथ ही एक कार तैयार की गई है।

डटसन की इस छोटी कार का बेसिक मॉडल केवल 4 हजार डॉलर यानि तकरीबन 2.5 लाख रुपए में उपलब्ध करवाया जाएगा, जबकि इसका टॉप मॉडल 5 हजार डॉलर यानि 3 लाख रुपए में उपलब्ध होगा।

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